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वाह रे समाज ! महिलाओं की काबिलियत को आज भी हम चूल्हे-चौके से आंकते हैं

“सुनों आज तुम खानें में क्या बना रही हो”

“आज संडे है तो कुछ अच्छी सी चीज बना दो, मन खुश हो जाये”

“एक कप चाय मिल जाती तो मज़ा आ जाता”

इस तरह के जुमले आपको हर घरों में सुनने को मिलेगें। पर क्या आपने कभी इसी जुमले को महिलाओं के मुहं से कहते हुये सुना है। या फिर किसी पुरूष को अपनी पत्नि से ये कहते हुये सुना है कि मैं खाना अच्छा बनाता हूं, आज के दिन मैं तुन्हें बनाकर खिलाऊंगा। ऐसे जुमले हर पुरूष के लिए बड़े ही हानिकारक होते हैं। शायद इसीलिए कोई नहीं बोलना चाहता..। आज हम इस पहलुओं से आपको अवगत करा रहे है। कि रसोई में हमेशा पूरा अधिकार महिलाओं का ही क्यों।

महिलाएं

यह आर्टिकल किसी एक लड़की के सामाजिक दायरे, या उसके अधिकारों और समाज में उसकी जगह को लेकर नहीं है ये आर्टिकल उस जद्दोजहद को लेकर है जो शायद आज के समय में हर लड़कियों के मन में उठती है कि बचपन से लेकर आज तक जिस मुक़ाम को पाने के लिए ज़िंदगी लगा दी, उसे पाने के बाद भी किचन ही उसका अस्तित्व क्यों है? आखिर क्यों मै भी एक लड़कों की तरह दिनभर काम करने के बाद घर आकर अपने बेड पर आराम से नहीं बैठ सकती? क्यों पूरे दिन मेहनत करने बाद तुंरत परिवार के खाने की चितां का अधिकार सिर्फ एक लड़की का होता है। इसका कारण सिर्फ एक ही है। हमारे यहां सदियो से एक परंपरा चली आ रही है कि लड़कियां कितने भी झंडे गाड़ ले, मगर खाना तुम्हें ही बनाना है।

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आज के समय में देखा जाये तो लड़कों के साथ हर लड़कियां कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है। सुबह से लेकर शाम तक जी तोड़ मेहनत करने के बाद जब औरत थकहार घर आती है तो घर के सद्स्य उनसे घर का काम करने की पूरी उम्मीद रखते है। क्योकि समाज के हर मर्द की सोच एक सी है कि दिनभर काम करने की थकान सिर्फ मर्द को ही हो सकती है किसी औरत को नही। बात यदि मेहनत की करें तो लड़कियां ख़ुद को हर क्षेत्र में साबित कर चुकी हैं। अब उन्हें किसी के लिए भी ख़ुद को साबित करने की ज़रूरत नहीं है। बस ज़रूरत है एक समझदार साथी और परिवार की।

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वर्किंग वुमेन के साथ यदि बात करें हाउस वाइफ की। तो वो भी पूरे घर की जिम्मेदारी लेकर दिनभऱ घर के कामों समें ही लगी रहती है। तब भी उसे यही बोल कर चुप करा दिया जाता है कि तुम्हें तो सिर्फ घर का काम करना है क्या घर काकाम एक खिलौना है जो खेलते हुये ही पूरा हो जाता है। ऑफिस में करने वालेों को तो एक दिन की छुट्टी मिल ही जाती हैष पर हाउस वाइफ को किसी भी तरह का अराम नही। क्योकि वो सिर्फ एक औरत है। …

पर क्या आप जानते है कि एक हाउस वाइफ की ड्यूटी ऑफिस में काम करने वालों से ज्यादा होती है समय के आधार पर देखें तो आपके ऑफिस का टाइम सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक का होता है पर एक घर पर काम करने वाली औरत की ड्यूटी सुबह 6 बजे से लेकर रात के सबके सो जाने के बाद तक चलती रहती है। दरअसल पुरूष वर्ग ये नही जानते, कि आज अगर वो घर पर है तभी तुम बाहर के हर काम बड़े ही आराम से कर पा रहे हो।

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