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कछुए की अंगूठी के लाभ जानकर हैरान रह जायेंगे आप, जानें यहां

आपको सबसे पहले बता दें की जिस प्रकार से भारत में वास्तु शास्त्र घर तथा जीवन से सम्बंधित है। उसी प्रकार से ऐसी ही एक विधा चीन में भी प्रचलित है। जिसको फेंगशुई कहा जाता है। इस विधा के अंतर्गत कुछ विशेष चीनी वस्तुओं को घर के स्थान विशेष में रखा जाता है ताकी घर तथा जीवन से जुड़ी समस्याएं ख़त्म हो सकें। फेंगशुई में कुछ ऐसी भी चीजें हैं जिनको मानव अपनी बॉडी पर पहन सकता है। इनको पहनने से न सिर्फ आप खूबसूरत दीखते हैं बल्कि आपके जीवन में भी सकात्मक प्रभाव आते हैं। आपने लाफिंग बुद्धा, लकी कॉइन तथा तीन टांग वाले मेंढक के बारे में पढ़ा या सुना ही होगा।

ये सभी फेंगशुई के अंतर्गत वाली चीनी वस्तुएं हैं। जो आपके जीवन में सकारात्मक प्रभाव को लाती हैं। इसी प्रकार से कछुए की अंगूठी भी फेंगशुई की इन वस्तुओं में से एक मानी जाती है। इसको धारण करने से आपके जीवन में कई लाभ होते हैं। आज बहुत से लोग कछुए की अंगूठी को धारण करते हैं लेकिन इसको धारण करने की सही विधि नहीं जानते हैं। इसी कारण वे इसके पूरे लाभ नहीं ले पातें। आइये हम आपको बताते हैं इसको धारण करने की सही विधि तथा इसके के लाभों के बारे में।

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कछुए की अंगूठी के लाभ –

कछुए की अंगूठी के लाभImage source:

कछुए की अंगूठी को घर में रखने से घर का वास्तु दोष ख़त्म हो जाता है तथा नकारात्मकता का भी अंत होता है। कछुए को हिंदू धर्म में देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। अतः इसकी अंगूठी को घर में रखने से घर में धन लाभ होता रहता है। कछुआ शांति और धैर्य का प्रतीक भी माना जाता है। इसकी अंगूठी को धारण करने वाले के अंदर शांति तथा धैर्य जैसे से अच्छे गुणों की बृद्धि होती है।

कछुए की अंगूठी पहनने की विधि –

कछुए की अंगूठी पहनने की विधिImage source:

कछुए की अंगूठी आज बहुत से स्त्री और पुरुष पहने दिखाई पड़ते हैं। लेकिन सही विधि तथा सही धातु से निर्मित अंगूठी न पहनने के कारण वे इसका पूरा लाभ नहीं ले पाते हैं। यही कारण है की आज हम आपको इस बारे में ही जानकारी दे रहें हैं। आपको सबसे पहले बता दें की कछुए की अंगूठी को चांदी की धातु में ही निर्मित कराना चाहिए। इस बात का भी आप ध्यान रखें की इस अंगूठी को सदैव दाएं हाथ में ही पहना जाता है। यदि आप बाएं हाथ में इसको धारण करते हैं तो इसका लाभ आपको नहीं मिलता है। इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखे की इसको सिर्फ बीच की अंगुली तथा तर्जनी अंगुली में ही पहना जाता है। जब आप इसको पहने टॉम इस बात का ध्यान रखे की अंगूठी के कछुयें का सिर बाहर की और निकला हुआ होना चाहिए। इस प्रकार से पहनी गई कछुए की अंगूठी ही आपको अपना पूरा लाभ देती है।

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